Tuesday, September 21, 2010

अयोध्या विवाद के फैसले पर सटोरियों की निगाहें !


लखनऊ २१ सितम्बर २०१० . अभी तक क्रिकेट और दूसरे खेलो पर सट्टा लगने वालो सटोरियों ने अपना ध्यान २४ सितम्बर को आने वाले अयोध्या के मालिकाना हक़ संबंधी हाईकोर्ट के निर्णय पर लगा दिया है. जहां एक तरफ देश के नेता और बुद्धिजीवी इस दिन को लेकर गंभीर है. वहीं सटोरिये को इस बात से कोई लेना देना नहीं है वह तो बस इस दिन को कैश करने में लग गए है. सूत्रों के अनुसार देश भर में इस मामले को लेकर २४०० करोड़ का सट्टा लगा हुआ है. जिसमे से लगभग ५०० करोड़ सिर्फ उत्तर प्रदेश में लगा है.

देश में अच्छे बुरी कोई भी हलचल हो, भारत में एक ऐसी इन्ड्रस्ट्रीज है जिसकी दिलचस्पी देश में होने वाली हर हलचल पर रहती है, भारत में उद्योग का रूप ले चुके इस धंधे से जुडे लोगो के लिए यह मायने नहीं रखता है कि कौन सी घटना देश के लिए कितनी फायेदेमंद है. अथवा कितनी नुकसानदायी है. उनके लिए यह बात ज्यादा जरूरी होती है किस घटना से उनको ज्यादा से ज्यादा फायेदा हो सकता है. यही कारण है कि २४ सितम्बर को अयोध्या विवाद के फैसले वाले दिन को भी नहीं छोड़ना चाहतें हैं.

हाल के दिनों में वर्ल्ड क्रिकेट सिरीज ख़त्म हो चुकी है और भारत और आस्ट्रेलिया के बीच होने वाली टेस्ट सिरीज़ १ अक्टूबर से शुरू होगी इससे पहले २४ सितम्बर को आ रहे हाईकोर्ट के इस निर्णय को सटोरिया सट्टे के लिए एक अच्छे मौके के रूप में देख रहे है.

पुलिस और दूसरी एजेंसी से बचने के लिए सट्टेबाज़ कई तरह के हतकंडे अपना रहे है, शहर में चल रहे दर्जनभर बड़ी बुक्की के कोड भी अजीब होते हैं, जिसे सट्टा से जुड़े लोग तो जानते हैं, आम लोगों के लिए यह भाषा समझ से परे है.लखनऊ में इस समय लेडीज एंड गेंट्स ,जोंसन एंड जोंसन, जेंट्स, ओके कोड से सट्टे की बुक्की चल रहे है. सूत्रों का कहना है कि पुराने लखनऊ में बड़े बाजार में मौजूद एक दुकान पर शाम पांच बजे से रात नौ बजे तक सट्टे में जीतने वालों को पेमेंट किया जाता है.

सटारियो ने बाकायदा अपने अड्डो पर क्लोज सर्किट कैमरे लगा रखे है. जिससे अड्डे के आसपास आने-जाने वालों खासकर पुलिस और मुखबिर पर नजर रखी जा सके. सूत्रों का दावा है कि कई बड़े सटोरिये सी.सी.टी.वी. कैमरे लगाकर बेबाकी से सट्टा खिलवा रहे है. सटोरियों की गिरफ्तारी के दौरान कई बार पुलिस को उनसे दर्जनों मोबाइल बरामद हो चुकें हैं. खास बात यह है कि कई-कई मोबाइल सेट एक ही आईडी से चलते हैं.

जानकारों का कहना है कि क्रिकेट और फुटबॉल पर लगने वाला सट्टा मुंबई से चलता है.मुंबई से सुबह सट्टा खुलते ही रेट तय कर दिए जाते हैं. इसके आधार पर सट्टा लगवाया जाता है.सट्टे में भाव हमेशा उल्टा लगता है. सट्टे में जिसका भाव कम पर खुलता है, उसे उतना ही मजबूत माना जाता है.

तीन दिन बाद आने वाले देश के अब तक के सबसे बड़े फैसले में सिर्फ इस बात पर सट्टा लगा है कि कोर्ट का निर्णय किसके पक्ष में जायगा.सटोरियों ने इस बात पर भी सट्टा लगा रखा है कि देश की जनता और राजनेता का अगला कदम क्या होगा.इस मामले में सटोरियों के अनुसार दोनों पक्ष में जिसके खिलाफ फैसला जायेगा, वो सुप्रीम कोर्ट जायेगा. इस मामले को ७० पैसे का भाव दिया गया है.बेईमानी के इस धंधे में सबसे ज्याद इमानदारी बरती जाती है. कई सटोरिये फोन पर ही दांव लगवाते हैं. हालांकि इनके पास रिकार्डिग मशीन भी होती है, ताकि दांव लगाने वाला बाद में न मुकरे.

सट्टा उद्योग के देश पैर पसरने के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार देश में मौजूद कमजोर कानून है. सटोरिए इसका फयदा उठाते है. सटोरियों के खिलाफ पुलिस समय-समय पर कार्रवाई करती रहती है, लेकिन कई बार पकड़े जाने के बावजूद सट्टा लगवाने वाले धंधा नहीं छोड़ते. जमानती अपराध होने के कारण मामूली मुचलके पर आरोपियों को थाने से ही छोड़ दिया जाता है.

इस बाबत अधिवक्ता अनुराग मिश्रा का कहना है कि गैंबलिंग के अंतर्गत १३ आरपीजी और ३/४ आरपीजी एक्ट में सजा का प्रावधान भी बेहद कमजोर है. दोनों ही एक्ट में छह माह सजा या पांच सौ रुपए जुर्माना अथवा दोनों का प्रावधान है. अधिकतर मामलों में आरोपी जुर्माना देकर ही छूट जाते हैं

Saturday, January 2, 2010

Happy New Year - 2009

New Year implies new hopes, new aspirations and new horizons. The advent of 2010 has brought fresh expectations not only from us but from the society as a whole. A new year is not just a time to look back at what we did the last year but also a time to reassess what we plan for the coming year. It is a time to reflect back at the changes we want to make and resolve to implement them too and that is the primary reason why the fashion of making resolutions came to the fore. Most of the people to celebrate their new venture of life adopt different ways to mark its beginning. Thenewsbond.com covered the New Year parties for those who wished to be a part of the celebrations but could not be. We wish you all a very happy, jubilant and prosperous new year.

Monday, November 23, 2009

Lucknow Mahotsav - 2009

नवाबों का लखनऊ या फिर दमकता नए दौर का लखन... ये तय करना शायद सबके लिए मुश्किल काम है, पर हाँ यह सच है कि लखनऊ नए दौर की रेस में दौड़ रहा है... और यह भी सच है कि आज भी इस शहर की पहचान नवाबों और उनकी नजाकत से है... आदाब और तहजीब इस शहर की शान थी और लगता है कि बनी रहेगी... वैसे तो पहले जब लखनऊ महोत्सव की शुरुआत हुई थी तो लगता था कि ये केवल नवाबी लखनऊ का प्रतिनिधित्व करता है, फिर लगा कि ये लक्ष्मण की नगरी है... और इस ये अहसास होगा कि शहर में और इमारते भी बनी है क्योंकि इस बार लखनऊ महोत्सव की थीम में अम्बेडकर स्मारक और कांशीराम स्मारक भी नज़र आयेंगे... लोग चाहे जितनी आलोचना करें लेकिन ये सच है कि ये स्मारक लखनऊ में बन कर तैयार हो गए हैं....
लखनऊ महोत्सव में इस बार डोना गांगुली से लेकर श्रेया घोषाल तक कई बड़े कलाकार नज़र आयेंगे.. मुख्यमंत्री मायावती 25 नवम्बर को लखनऊ महोत्सव का उद्घाटन करेंगी। मुख्यमंत्री महोत्सव की पत्रिका उर्मिला का विमोचन भी करेंगी। राज्यपाल बीएल जोशी 5 दिसम्बर को समापन करेंगे। उद्घाटन के दिन मशहूर क्रिकेटर सौरभ गांगुली की पत्नी ओडिसी नृत्यांगना डोना गांगुली नृत्य प्रस्तुत करेंगीं। 26 को नलिनी कमलिनी का नृत्य व अन्य कलाकार भगवान बुद्ध की जीवनी पर आधारित कार्यक्रम पेश करेंगे। 27 को श्रेया घोषाल का शो, 28 को हंसने-गाने कार्यक्रम, 29 को कवि सम्मेलन और बुद्ध चरित्रम् नृत्य नाटिका, 30 को गीता गायन, एक दिसम्बर को सूफी गायकी, दो को गायक शान का शो, तीन को संगीत कार्यक्रम, चार को मुशायरा आयोजित किया जाएगा.
ये बात तो शायद सबको मालूम होगी कि महोत्सव का आयोजन हर साल २५ नवम्बर से ५ दिसम्बर होता है और इसकी शुरुआत १९७० में हुई थी | दरअसल अवध की धरोहर और संस्कृति का प्रचार प्रसार के लिए लखनऊ महोत्सव की शुरुआत की गयी. लखनऊ महोत्सव में न केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं बल्कि यहाँ नायाब दस्तकारी और कला का अदभुत संगम होता है. और ये एक ऐसा अनुभव होता है जो सबके दिल को खुश कर देता है. इक्का - तांगा दौड़, पतंगबाज़ी, नौका दौड़, विंटेज कार रैली, मुर्गो की लडाई जैसे पारम्परिक खेल भी यहाँ देखने को मिल जाते हैं और हाँ यहाँ होने वाला युवा महोत्सव का नज़ारा भी बेहतरीन होता है... यही वजह की लखनऊ महोत्सव में आने वाले लोगों की संख्या लाखों में होती है...
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