नवाबों का लखनऊ या फिर दमकता नए दौर का लखनऊ... ये तय करना शायद सबके लिए मुश्किल काम है, पर हाँ यह सच है कि लखनऊ नए दौर की रेस में दौड़ रहा है... और यह भी सच है कि आज भी इस शहर की पहचान नवाबों और उनकी नजाकत से है... आदाब और तहजीब इस शहर की शान थी और लगता है कि बनी रहेगी... वैसे तो पहले जब लखनऊ महोत्सव की शुरुआत हुई थी तो लगता था कि ये केवल नवाबी लखनऊ का प्रतिनिधित्व करता है, फिर लगा कि ये लक्ष्मण की नगरी है... और इस ये अहसास होगा कि शहर में और इमारते भी बनी है क्योंकि इस बार लखनऊ महोत्सव की थीम में अम्बेडकर स्मारक और कांशीराम स्मारक भी नज़र आयेंगे... लोग चाहे जितनी आलोचना करें लेकिन ये सच है कि ये स्मारक लखनऊ में बन कर तैयार हो गए हैं....लखनऊ महोत्सव में इस बार डोना गांगुली से लेकर श्रेया घोषाल तक कई बड़े कलाकार नज़र आयेंगे.. मुख्यमंत्री मायावती 25 नवम्बर को लखनऊ महोत्सव का उद्घाटन करेंगी। मुख्यमंत्री महोत्सव की पत्रिका उर्मिला का विमोचन भी करेंगी। राज्यपाल बीएल जोशी 5 दिसम्बर को समापन करेंगे। उद्घाटन के दिन मशहूर क्रिकेटर सौरभ गांगुली की पत्नी ओडिसी नृत्यांगना डोना गांगुली नृत्य प्रस्तुत करेंगीं। 26 को नलिनी कमलिनी का नृत्य व अन्य कलाकार भगवान बुद्ध की जीवनी पर आधारित कार्यक्रम पेश करेंगे। 27 को श्रेया घोषाल का शो, 28 को हंसने-गाने कार्यक्रम, 29 को कवि सम्मेलन और बुद्ध चरित्रम् नृत्य नाटिका, 30 को गीता गायन, एक दिसम्बर को सूफी गायकी, दो को गायक शान का शो, तीन को संगीत कार्यक्रम, चार को मुशायरा आयोजित किया जाएगा.
ये बात तो शायद सबको मालूम होगी कि महोत्सव का आयोजन हर साल २५ नवम्बर से ५ दिसम्बर होता है और इसकी शुरुआत १९७० में हुई थी | दरअसल अवध की धरोहर और संस्कृति का प्रचार प्रसार के लिए लखनऊ महोत्सव की शुरुआत की गयी. लखनऊ महोत्सव में न केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं बल्कि यहाँ नायाब दस्तकारी और कला का अदभुत संगम होता है. और ये एक ऐसा अनुभव होता है जो सबके दिल को खुश कर देता है. इक्का - तांगा दौड़, पतंगबाज़ी, नौका दौड़, विंटेज कार रैली, मुर्गो की लडाई जैसे पारम्परिक खेल भी यहाँ देखने को मिल जाते हैं और हाँ यहाँ होने वाला युवा महोत्सव का नज़ारा भी बेहतरीन होता है... यही वजह की लखनऊ महोत्सव में आने वाले लोगों की संख्या लाखों में होती है...
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good work done
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